नए वर्ष का मंगल स्वागत
पल पल कर के आखिर फिर से, साल पुराना गुजर गयाएक बार फिर सुबह हुई तो नया नया उत्साह भर गयानया नया सा क्या है इसमे, क्यों अज्ञात ख़ुशी है मन में यहीं सोंच कर खोया हूँ मैं, झांक रहा हूँ मन दर्पण मेंनए साल का पहला दिन भी, बीत चला है न जाने कबनए वर्ष की नयी...
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राकेश
नववर्ष
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[01 Jan 2010 22:51 PM]



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