समझो मुझे....

अनामिका...... क्या तुम अनभिज्ञ होमेरे हालातो से..मैने तो हर प्रष्ठखोल के रख दिया हैंतुम्हारे सामनेअपनी किताब का.क्यू नही समझ पातेतुम, मेरी मजबूरियाऔर दे देते होहर बार इल्जाममेरी विवशताओ कोक्या तुम्हेआडंबर लगती हैंसारी बातेक्यो तुम अविश्वास मेंजीते हो ?और विष उडेलअपने... [पूरी पोस्ट]
writer अनामिका की सदाये......
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[02 Jan 2010 13:29 PM]

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