गीत - दीवारों पार बस कलेंडर बदला बदला है

virendra jain ke nashtar नया नया क्या है शाम वही थी सुबह वही है नया नया क्या हैदीवारों पर बस कलैंडर बदला बदला हैउजड़ी गली, उबलती नाली, कच्चे कच्चे घरकितना हुआ विकास लिखा है सिर्फ पोस्टर परपोखर नायक के चरित्र सा गंदला गंदला हैदीवारों पर बस कलैंडर बदला बदला हैदुनिया वही, वही... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन

वीरेंद्र जैन

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[02 Jan 2010 13:29 PM]

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