कल की तैयारी

Arshad ke man se........ मुझे हमेशा लगता रहा है,जहाँ चाह वहीँ राह मगर आज थोडा विश्वाश डगमगाया सा लगा.अपने ऑफिस के काम से आज जितने लोगों से मिला उनमे एक भी मुझे अपनी बात कहने में मदद करते नहीं दिखे .निराश मुझे होने की ज़रूरत नहीं थी मगर निराशा दूर से मुझे ललचाती रही.एक उम्मीद की... [पूरी पोस्ट]
writer Arshad Ali
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[07 Dec 2009 08:47 AM]

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