एक बार कह लेते प्रियतम

मानसी एक बार कह लेते प्रियतमघना कुहासा धुँआ-धुँआ साछँट जाता घुप्प आसमां बँधा-बँधा सा कट जाताकोरों पे ठहरी दो बूँदेबह जाती चुपके से अंतिमएक बार कह लेते प्रियतमकही नहीं पर कहीं जो बातेंमूक आभासदो प्राणों के गुँथे हवा मेंकुछ निश्वासअधरों पर कुछ काँपते से स्वर भी... [पूरी पोस्ट]
writer मानसी

poetry

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[02 Jan 2010 10:20 AM]

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