नक़ाब पोशियां भायी जिन्हें वो बुत तो नहीं

नया ठौर नक़ाबपोशी को लेकर जानी -मानी पत्रिका तहलका में एक नये नज़रिये पर नज़र पड़ी। आप भी पढ़ें, शायद आपको भी पसंद आए- संजीवअक्सर मध्यकालीन बर्बरता के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है हिजाब। पर निशा सूजन को अचरज है कि लोग उनसे भी क्यों नहीं पूछते जिन्होंने खुद ही... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव

साभारः तहलका

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[02 Jan 2010 09:50 AM]

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