नए साल का समाज
पुराना साल भले ही कुछ भद्र पुरुषों को खामोश परिवर्तन का साल लगा हो लेकिन इसमें खामोश चीखें भी थी जिसे भद्रलोक सुन नहीं पाया, सुनना भी नहीं चाहता। ये चीखें उस तरफ से आ रही थी जिधर लोग भूख और दरिद्रता से वक्तिगत तौर पर छुटकारा पाने के लिए अपने मासूम बच्चे...
[पूरी पोस्ट]
बच्चन सिंह
20
1
0
1
2
[02 Jan 2010 08:54 AM]



Shuffle








