थ्री इडियट्स से उलझते फाइव पाइंटर
पिछले साल जब मैं चेतन भगत से मिली थी, उनके किताब पढ़ने के बाद वे एक यंग राइटर लगते थे, जिसका आब्जर्वेशन का नजरिया बिलकुल अलग है। उनसे मिलने के बाद मुझे लगा कि वो इंसान भी उतने ही अच्छे हैं. एक साधारण भारतीय की तरह सोचते हैं और एक अच्छे इंसान की तरह लिखते...
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neelima sukhija arora
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[02 Jan 2010 07:36 AM]



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