नाच
उसका नाच कितना अलग था!एक बिंदु में जैसे उसकी कमर समाप्त हो जाती थी और फिर देह उसी बिंदु के गुरुत्व केंद्र पर दो हिस्सों में बंटकर घूर्णन करती थी। तेज़ और तेज़ फिर तेज़!कटि के नीचे का भाग अलग घूमता लगता और उसके ऊपर का भाग भिन्न वर्तुल में घूमता था। ये...
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sanjay vyas
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[02 Jan 2010 06:11 AM]



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