फिर मिलेंगे चलते चलते...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! अरे! तुम...मेरे दाहिने ओर से आई एक मीठी सी आवाज ने अचानक मेरा ध्यान उचटा दिया। तुम यहां कैसे? लोकल हो क्या? यहां कोई काम से आए हो? क्या करते हो?एक मिनट के भीतर ही इतने सारे सवालों ने मुझसे उस 24-25 की युवती का परिचय बढ़ाना शुरू कर दिया।मैं बिल्कुल बेवाक... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम

दिल्ली

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[02 Jan 2010 06:18 AM]

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