ग़ज़ल - मेरी फ़ितरत अगर तुम जान लेते

kavideepakgupta मेरी फ़ितरत अगर तुम जान लेतेकहा मेरा ख़ुशी से मान लेतेइशारे ग़र समझते आईने केयकीनन ख़ुद को तुम पहचान लेतेक़दम मंज़िल पे जाकर ही ठहरतेज़रा सी ज़िद अगर हम ठान लेतेकिनारा कर लिया हमने ही उनसेकिसी के कब तलक अहसान लेतेचुराया दिल औ छीना चैन मेराअमा क्या और मेरी... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
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[02 Jan 2010 06:08 AM]

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