ख्वाब
मेरे दादी-दादाजी और गाँव के उस कच्चे मकान की प्यारी याद में जो अब बस याद और ख्वाब में ही नसीब हैं.आसमान के सितारे हर रात उतर के मेरी आँखों में झिलमिलाने चले आते थे,चाँद रोज़ उतर के थपकी देता था, फिजालोरियां सुनाती थी. कई ख्वाब फलक से...
[पूरी पोस्ट]
●๋• नीर ஐ
my poems
13
0
0
0
1
[02 Jan 2010 05:18 AM]



Shuffle








