नई शाम
नव वर्ष की शाम में डूबेकितने युवा जाम में डूबे । जो गुंडे हैं गरियाये,मोटर-साइकिल की शान में डूबे । प्रेमियों ने तलाशे कोने,यौवन की उड़ान में डूबे । ढलती शाम का दर्द ढो रहे,प्रार्थना और अज़ान में डूबे । जो बहक गये क़दम उनके,जवानी के उफ़ान में डूबे । पार्टी...
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राकेश 'सोहम'
ग़ज़ल
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[02 Jan 2010 04:24 AM]



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