हरी भई बनराइ
कबिरा बादल प्रेम का, हम परि बर्ष्या आइ
अंतरि भीजी आत्मा, हरी भई बनराइ
साधो, प्रेम के बादल में भीगो. तुम्हारे अंदर की आत्मा, तक इससे भीग जायेगी.
तुम अभी ज्ञान पोथी की जो बातें कर रहे हो, वो सब भूल जाओगे.
तुम कहते तो रोमिल्ला थापर ने ये कहा था!
तुम कहते हो...
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daskabir
चंहु दिसि लागी आग
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[14 May 2007 20:24 PM]



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