हरी भई बनराइ

दास कबीर कबिरा बादल प्रेम का, हम परि बर्ष्या आइ अंतरि भीजी आत्मा, हरी भई बनराइ साधो, प्रेम के बादल में भीगो. तुम्हारे अंदर की आत्मा, तक इससे भीग जायेगी. तुम अभी ज्ञान पोथी की जो बातें कर रहे हो, वो सब भूल जाओगे. तुम कहते तो रोमिल्ला थापर ने ये कहा था! तुम कहते हो... [पूरी पोस्ट]
writer daskabir

चंहु दिसि लागी आग

views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[14 May 2007 20:24 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix