दुआ करें कि हलकान भाई के ब्लॉग पर जल्द ही कोई लाइबेरिया से पधारे.
कल हलकान भाई के घर जाना हुआ. सोचा नए साल के शुभ अवसर पर मिल आऊँ. आजकल वैसे भी नए साल, फ्रेंडशिप डे वगैरह जितने शुभ होते हैं उतना होली-दिवाली वगैरह नहीं होते. हलकान भाई के घर पहुंचे तो देखा कि अपनी ब्लागिंग टेबल पर बैठे थे. बायें हाथ में दो पन्नों वाला एक...
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Shiv Kumar Mishra
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[02 Jan 2010 01:18 AM]



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