मुंतज़ार अल ज़ैदी की तरह हिम्‍मत वाला क्‍या कोई पत्रकार वहां नहीं था जो विधु विनोद चोपड़ा को जूता मारने की हिम्‍मत करता ।

कुछ ख़बरें और कुछ बातें ( ये लेख केवल पत्रकारों के लिये है क्‍योंकि गैर पत्रकार लेख की कई बातों से असहमत हो सकते हैं ) स्‍वयं पत्रकार होने के कारण अक्‍सर इस बात से दुखी होता हूं कि अब पत्रकारिता में वह पहले जैसा साहस नहीं बचा । उसके पीछे भी एक कारण ये है कि अब तो पत्रकार कहीं... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[01 Jan 2010 21:52 PM]

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