फर्क औकात का है....!
आदाब...आज कल हाथ कुछ ज्यादा जुनूनी है ... एक और ताज़ा ग़ज़ल अपनी जानिब से बहर-ए-मुतकारिब सालिम मे आपकी नज़र कर रहा हूँ..आप अपनी आरा से नवाजेंगे उम्मीद करता हूँ...=========================बहर :- मुतकारिब मुसम्मन सालिम (Fa-uu-lun Fa-uu-lun...
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Kunaal
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[01 Jan 2010 12:35 PM]



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