सन्नाटा

आर्जव अलग होते मुझ के साथ बहुत दूर तक टूटा नहीं तुम्हारी पुकार का स्वर ! ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,दूर निकल आये मुझ के साथ उस स्वर के पीछे बचा सन्नाटा अब भी है !,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,सुनायी देता है लेकिन सुनता नहीं हूँ उस सन्नाटे का... [पूरी पोस्ट]
writer Aarjav

कविता

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[01 Jan 2010 14:41 PM]

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