आएगी सुबह

हिमाल : अपना-पहाड़ जैसे आज सुबहघने अंधेरे से फूटी थी किरणेंजैसे नन्ही कली... ओस से दबीखिली थी धूप मेंजैसे रात की ठंड में सिकूड़ी नाजुक तितलीचहक रही थी... सुबह-सुबहजैसे अमावस के बादचांद फिर उभरा थावैसे ही उदासी का ये पल भी बीतेगादुख जाएगाखुशियां लौटेंगी ।।... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट

मेरी कविता

views
16
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[01 Jan 2010 09:54 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix