मेरे शहर के शायर
-: बशी़र बद्र :- किसे ख़बर थी तुझे इस तरह सताऊंगाज़माना देखेगा और मैं न देख पाऊंगा हयातो मौत फिराको विसाल सब यक़ज़ामैं एक रात में कितने दिये जलाऊंगा पला बढ़ा हूं तक इन्हीं अंधेरों मेंमैं तेज़ धूप से कैसे नज़र मिलाऊंगा मेरे मिजाज़ की मादराना फितरत हैसवेरे सारी...
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A.U.SIDDIQUI
ग़ज़ल
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[14 Nov 2009 19:02 PM]



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