इंसान
इंसान में हैवान यहां भी है वहां भीअल्लाह निगेहबान यहां भी है वहां भीखूंखार दरिन्दो के फ़क़त नाम हैं अलगशहरों में बियाबान यहां भी है वहां भीरहमान की कुदरत हो या भगवान की मूरतहर खेल का मैदान यहां भी है वहां भीहिन्दू भी मज़े में हैं मुसलमां भी मज़े मेंइन्सान...
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A.U.SIDDIQUI
ग़ज़ल
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[20 Nov 2009 18:56 PM]



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