अब ये होगा शायद

महफ़िल ए आदाब अब ये होगा शायद अपनी आग में ख़ुद जल जायेंगेतुम से दूर बहुत रहकर भी क्या खोया क्या पायेंगेदुख भी सच्चे सुख भी सच्चे फिर भी तेरी चाहत मेंहमने कितने धोके खाये कितने धोके खायेंगेअक़्ल पे हम को नाज़ बहुत था लेकिन कब ये सोचा थाइश्क के हाथों ये भी होगा लोग हमें... [पूरी पोस्ट]
writer A.U.SIDDIQUI

ग़ज़ल

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[18 Nov 2009 05:04 AM]

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