मेरे शहर के शायर..
आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखाकश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखाबे- वक्त अगर जाऊंगा सब चौंक पडेंगेमुद्दत हुई दिन में कभी घर नहीं देखाजिस दिन से चला हूं मेरी मंज़िल पे नज़र हैआंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखाये फूल मुझे कोई विरासत में मिले...
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A.U.SIDDIQUI
ग़ज़ल
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[22 Nov 2009 16:50 PM]



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