जब किसी से कोई गिला रखना
जब किसी से कोई गिला रखनासामने अपने आईना रखनायूं उजालों से वास्ता रखनाशम्मा के पास ही हवा रखनाघर की तामीर चाहे जैसी होइसमें रोने की कुछ जगह रखनामस्जिदें हैं नमाज़ियों के लियेअपने घर में भी कहीं ख़ुदा रखना- निदा फाज़ली...
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A.U.SIDDIQUI
ग़ज़ल
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[24 Nov 2009 08:20 AM]



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