उसके दुश्मन हैं बहुत
उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगावो भी मेरी तरह इस शहर में तन्हा होगाइतना सच बोल कि होंठों का तबस्सुम न बुझेरोशनी ख़त्म न कर आगे अंधेरा होगाप्यास जिस नहर से टकराई वो बंजर...
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A.U.SIDDIQUI
ग़ज़ल
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[02 Dec 2009 04:36 AM]



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