एक ग़ज़ल
कभी मुझ को साथ लेकर कभी मेरे साथ चलकेवो बदल गए अचानक मेरी ज़िन्दगी बदलकेहुए जिस पे महरबां तुम कोई ख़ुशनसीब होगामेरी हसरतें तो निकलीं मेरे आंसुओं में ढलकेतेरी ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के कुरबां दिले ज़ार ढूंढता हैवही चम्पई उजाले , वही ...
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A.U.SIDDIQUI
ग़ज़ल
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[04 Dec 2009 14:08 PM]



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