कहा न जाए

महफ़िल ए आदाब तय होंगे किस तरह से मराहिल कहा न जाएइस  तीरगी  में  क्या  है हासिल कहा न जाएख़ुद  दे  दिये  हैं  मैंने  उसे  हाथ  काट  करवो लिख दिया है जो सैरे महफ़िल कहा न जाएपत्थर  हुए  वो ... [पूरी पोस्ट]
writer A.U.SIDDIQUI

ग़ज़ल

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[06 Dec 2009 08:19 AM]

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