एक ग़ज़ल
ग़म रात - दिन रहे तो ख़ुशी भी कभी रहीएक बेवफा से अपनी बड़ी दोस्ती रहीउनसे मिलने की शाम घड़ी दो घड़ी रहीऔर फिर जो रात आई तो बरसों खड़ी रहीशामे विसाल दर्द ने ...
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A.U.SIDDIQUI
ग़ज़ल
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[08 Dec 2009 22:06 PM]



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