जीना है कैसे मुझको
जीना है कैसे मुझको तन्हा न फैसला करख़ुशियों से राय ले ले ग़म से भी मशवरा करदुनिया की भीड़ में मैं गुम हो के रह गया हूंऎ आईने मुझे तू माज़ी ज़रा अता करथक कर न बैठ जाना राहों में ऎ मुसाफिरमंज़िल तुझे मिलेगी...
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A.U.SIDDIQUI
एक शायर
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[14 Dec 2009 14:45 PM]



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