दुनिया सजी हुई है
दुनिया सजी हुई है बाज़ार की तरहहम भी चलेंगे आज ख़रीदार की तरहटूटे हों या पुराने हों अपने तो हैं यहीख़्वाबों को जमा करता हूं आसार की...
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A.U.SIDDIQUI
एक शायर
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[22 Dec 2009 05:02 AM]



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