हाहा ही ही.. बजट्ट अली बजट्ट अली, हो बजट्ट अली

बस यूँ ही निट्ठल्ला सोचा कुछ – हुआ कुछ और ही है निट्ठल्लों सँग ही ऎसा होता क्यूँ है सोचा कि कम्पू बेबी को हाथ न लगाऊँगा अपने सड़े विचारों का अचार पक न जाये जब तक शब्दों की खटास में तनिक मिठास न [...]... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार

सुअरथ टाइमपास

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[24 Dec 2009 16:22 PM]

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