चले जाना नहीं, होश उड़ाय के

बस यूँ ही निट्ठल्ला मेरे मित्र डा. एस.एम. सिंह, यहाँ एक सफल आर्थोपेडिक सर्ज़न हैं । कभी वह कार्टूनिंग में दखल रखा करते थे । पर जैसा कि इस पेशे में होता है , अधिकाँश जन अपने शौक, ललित प्रतिभा और मनोलालसा को इस पेशे की बलि देने से रोक नहीं पाते । लगातार उकसाये जाने पर वह पिछले... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार

बुरबकई

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[24 Dec 2009 17:11 PM]

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