चलो, मेरा लिखा मत पढ़ो, पर इसको तो न छोड़ो
जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर यह ज़ब्बर टाइप शीर्षक दिखला कर यूँ ही फुसला कर बुला लूँ, और यहाँ एक वाह-वाह आलेख पकड़ा दूँ… यह हमसे न होगा ! अपने मुँह मियाँ मिट्ठू…...
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डा. अमर कुमार
बनर-खुज़ली
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[24 Dec 2009 17:08 PM]



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