ग़ज़ल
ये बात झूठ है, कि सब झूठ है ज़माने में !नहीं फरेब , किसी बच्चे के मुस्कुराने में !!क्या कभी चाँद भी रूठता है , कहीं सूरज से फासला तय ही सही , दोनों के आने जाने मेंआराम खुद ही , सदा दिल को गुदगुदायेगा लगा समय , किसी बजुर्ग के पांव दबाने में !समझ पैगाम ,...
[पूरी पोस्ट]
sanjeev kuralia
ग़ज़ल
21
2
0
2
4
[01 Jan 2010 09:08 AM]



Shuffle








