धर्मयुद्ध

Blue Monk's Social Attire धर्मयुद्ध इस किताब के अंतिम पृष्ठों सेन जाने क्यों "सड़ांध" सी,श्वास छिद्रों में प्रविष्ट होती है,पागल कर देती है अपने,अनदेखे अनजान कड़े हाथों से.दबा कर मेरे स्वप्नों का गला,निकाल देती हैं रस,यादों के मधुर उपवन सेकुंठित किये दे रही हैं,समुचित सुद्रिश... [पूरी पोस्ट]
writer Blue Monk
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[01 Jan 2010 08:16 AM]

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