मुर्दा कब्र से बाहर आया
हरिओम त्यागीमुझे अपनी सांस रूकती सी नज़र आने लगी, गला घुटने से मेरी जीभ बहार निकल आई, मुझे लगा कि अब मेरे प्राण पखेरू उडऩे ही वाले हैंदिनांक -३१-१२-२००९, साल का अन्तिम दिन भी बीत गया था, रात का तीसरा पहर शुरू हो गया था। आसमान पर बादल मंडरा रहे थे बादलों...
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हरिओम त्यागी
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[01 Jan 2010 05:19 AM]



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