कृतज्ञता ! कृतज्ञता ! कृतज्ञता !

साहित्य-सहवास जिन सेयह देह मिलीदेह कोस्नेह दुलार और विस्तार मिलाजीवन मिलाजीवन के पौधे नैतिकता का संचार मिलाश्रमशील और स्वाभिमानी रहने का संस्कार मिलाप्यार मिलादुलार मिलाघर मिलापरिवार मिला समाज मिला .........संसार मिलावो सब मिला बिन मांगे,जो मुझे मांगना भी नहीं आता... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com

मुक्त काव्य

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[01 Jan 2010 04:26 AM]

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