ये तेरे इशारे..
तेरे इशारों पर रात की रिहाई हो,तेरे इशारों पर चाँद की जम्हाई हो,तेरे इशारों पर तीरगी निखर जाए,जैसे अमावस की खुलती कलाई हो।तेरे इशारे इशारे नहीं हैं,ये तिनके हैं बहते अथाह सागरों मेंजहाँ आस जीने की ज़िंदा नहीं हैन साँसें बची है, न हीं हौसले हैंन उम्मीद है...
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विश्व दीपक
vishwa deepak tanha
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[01 Jan 2010 03:30 AM]



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