पिता हैं साथ तो पुत्र तन्हा नहीं होता (अविनाश वाचस्पति)
जिसको कभी लालच नहीं होताहोता है, पर अपने लिए नहींचाहता है मन सब करे अर्पणसमर्पण सब यहीं पर है होता।पिता पर्याय है सदा देने कापुत्र तैनात सदा सब पाने कोदेकर भी सब कुछ यहां परपिता बीज सदा सुख के बोता।देता है सब कुछ खुशी खुशीचाहे संतान रहे सदा सुखीपिताजी का...
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अविनाश वाचस्पति
अविनाश वाचस्पति
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[01 Jan 2010 02:53 AM]



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