इबादत भी ज़रूरी है

हया चलो अब वार बन जाएँ ,के अब तलवार बन जाएँके अब तेज़ाब की बहती हुई इक धार बन जाएँबहुत ठंडी हवा बनकर बहे ,अब आंधियां बनकरबग़ावत का नया इक सिलसिला ,विस्तार बन जाएँगुज़िश्ता कई वर्षों के हालात को मद्दे -नज़र रखते हुए आप सबको नरम तेवर वाली दुआएं देने को दिल... [पूरी पोस्ट]
writer लता 'हया'
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[01 Jan 2010 02:13 AM]

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