उनके लिए कुछ लिख डाला...

samwaadghar हिचक, झिझक में, बंद घरों मेंलोगों के, दुनिया के डरों मेंबेमतलब यूं उम्र गुज़ारीचलो आज फिर अपनी बारी....सोचता था कि क्या लिखूं तुमकोकि अक्षरों में सही, मैं भला दिखूं तुमकोलिखूं वो बात नयी जो तुम्हे हिला डालेजो सो गया तुममें, उसको फ़िर जगा डालेवो ग़लतियां वो... [पूरी पोस्ट]
writer sanjaygrover

कविता

views
19
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
11
[01 Jan 2010 02:13 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix