चलो चलें एक नये से ख्वाब में.......
एक कदम में बढ़ चले हम, एक नये से साल में, एक नई मंजिल को थामें, एक नये से ख्वाब में। है सफर ये फिर वही, जोकि पिछली बार था, है मगर अब नई उमंगे, एक नयी सी बात में। कुछ कहानी कल की...
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PREETI BARTHWAL
poetry
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[01 Jan 2010 02:07 AM]



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