शुभकामना !
मन से उर -कम्पन से लिखूँ शुभकामना । उँगली तुम जीवन में स्नेह की थामना । उगते रहें सूरज नित द्वार तुम्हारे । तुम नहीं हारना जग चाहे ये हारे । करना न पड़े कभी दु:खों का सामना । -रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'जीवन एक कला है । साहित्य उसी का सहज मार्ग है ।...
[पूरी पोस्ट]
सहज साहित्य
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
14
0
0
0
2
[01 Jan 2010 02:16 AM]



Shuffle








