फ़्लू का आलू बन गया

शुऐब इत्र की ख़ुशबू जैसा ये कैसा फ़्लू फैल गया, दूसरों का देख हमने भी चेहरे पे मास्क चढ़ालिया। हमारे इस अंदाज़ पर अन्य लोगों ने कुछ ना बोला मगर गली मे आराम फ़रमा रहे कुत्तों को हमारा ये अंदाज़ पसंद ना आया। झटसे खडे होकर हमारे मूंह पे भोंकना शुरू करदिया। ज्लदी... [पूरी पोस्ट]
writer शुऐब

खुदा से मिलो

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[31 Aug 2009 06:10 AM]

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