हर बार नए साल का सूरज करता है हमसे वायदा

आत्मदर्पण हर बार नए साल का सूरज करता है हमसे वायदाकिइस साल खत्म कर दूंगाकुपोषण, भ्रष्टाचार, गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, अनाचारइस नए साल मैं मिलेगी सभी को सूचनामिलेगा सभी को काम और काम का पूरा दामलेकिन नहीं निभाता है यह वायदा अपना !!!!!हम भी तो करने देते हैं सूरज को... [पूरी पोस्ट]
writer प्रशांत दुबे
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[01 Jan 2010 02:00 AM]

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