नया साल, बूढी चांद.

सलाम करता चलूं नया साल.वही पुराना सूरज, पीली धूपबूढी चांद, थकेली चान्दनीएक्वागार्ड से निकला पानीईटों का कब्र, मकानरिश्तों में मीलों के फ़ासलेहरी घास, घिस चुके गुलाबपापी पेट का रोनाबुजूर्ग ख्वाहिशें, मकान, गाडी, अच्छी नौकरीटी.वी, फ़्रिज, वाशिंग मशीनठेकों पे लम्बी... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[31 Dec 2009 22:48 PM]

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