नूतन आस जगाने दो

मनोरमा नये साल का स्वागत करके, नूतन आस जगाने दो।कल क्या होगा, कौन जानता, मन की प्यास बुझाने दो।। क्या खोया, क्या पाया कल तक, अनुभव के संग ज्ञान यही।इसी ज्ञान से कल हो रौशन, यह विश्वास बढ़ाने दो।। जो न सोचा, हो जाता है, नहीं हारते वीर कभी।सच्ची कोशिश, प्रतिफल... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन

कविता

views
19
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
17
[31 Dec 2009 20:28 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix