नये साल में रामजी...

सच्चा शरणम् उल्लास की संभावनायें लेकर आता है नववर्ष । न जाने कितनी शुभाकांक्षायें, स्वप्न, छवियाँ हम सँजोते हैं मन में नये वर्ष के लिये । अनगिन मधु-कटु संघात समोये अन्तस्तल में विगत वर्ष का विहंग उड़ जाता है शून्य-गगन में । हम नये फलक के लिये उत्सुक हो उठते हैं ।... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

कविता

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[31 Dec 2009 18:35 PM]

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