नया तराना नये साल का

गठरी उम्मीदों भरा क्या नया साल होगा ?हर देशवासी क्या खुशहाल होगा ?सभी को सुबह शाम रोटी मिलेगी या मंहगाई का फिर महाजाल होगा ?क्या अपराधियों की भी आयेगी शामत या फिर पहुंच का उन्हें ढ़ाल होगा ?करेगा दलाली वो काटेगा चाँदी जो खेती करेगा क्या बदहाल होगा... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार

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[31 Dec 2009 03:51 AM]

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