अवघट-१
कबीर एक खोज है एक ऐसी यात्रा जिसका ना कोई पड़ाव और ना कोई मंजिल। मंजिल या तो जाने के लिए होती है या पाने के लिए लेकिन यह तो एक अनजाना सा अनुभव है जिसका होना ही भीतर एक गुदगुदी पैदा करता है। एक ऐसी उर्जा जो अपने भीतर करोड़ों छिद्रों से होती हुई आपको तड़पने...
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Gopal Singh
अवघट
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[08 Oct 2008 12:36 PM]



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